डोकलाम हो या कश्मीर, भारत के रुख में जो मजबुती देखने मिली वो देश के भीतर आये बदलाव का नतीजा है !


कश्मीर में सबसे पुराना और सबसे महंगा आतंकवादी अबू दुजाना भी आज मौत के घाट उतार दिया गया। यह खबर तो बड़ी है ही लेकिन इससे जुड़ी एक और खबर भी कम विशेष नहीं है। वह खबर यह है कि जिस समय एनकाउंटर शुरू हुआ उसी समय इलाके की मस्जिदों से मुल्लों ने लोगों से अपील करना शुरू कर दिया था कि लोग एनकाउंटर स्थल पर पहुंचकर सेना के काम में अड़ंगा डालें ताकि अबू दुजाना बचकर भाग सके।


मुल्लों की अपील पर कुछ लोगों ने एनकाउंटर स्थल पर पहुंचकर ऐसा करने की कोशिश भी की थी लेकिन एनकाउंटर स्थल से एक निश्चित दूरी पर घेराबंदी कर के खड़े जवानों की बंदूकों के मुंह उस भीड़ की तरफ इस चेतावनी के साथ घूम गये थे कि इससे आगे बढ़े या बहके तो तुमलोगों से बंदूक बात करेगी। परिणामस्वरूप मुट्ठी भर लफंगों की रूह कांप गयी थी, क्योंकि पहले उनकी ऐसी करतूतों पर लाठी चलाने से भी बहुत परहेज़ करते थे सुरक्षाबल। अतः वो लफंगे वहां हल्की फुल्की नारेबाजी कर के बैरंग लौट गए थे।

खबर यह भी है कि उन लफंगों को भी चिन्हित कर लिया गया है। एनकाउंटर समाप्त होने के बाद थानों और सेना के कैम्पों में उनकी भी मेहमान नवाजी का समुचित प्रबन्ध किया जा रहा है। यह उदाहरण है इसबात का कि इनदिनों कश्मीर घाटी में कैसे तेवरों और तैयारी के साथ सेना और सुरक्षाबल का अभियान चल रहा है।


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जैसे जैसे राज्यों और राज्यसभा में भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है वैसे वैसे ही भाजपा अपने राष्ट्रवादी एजेंडे को आगे बढाती जा रही है. अब जम्मू & कश्मीर से धारा 370 को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. इसके लिए सबसे पहले इसके अनुच्छेद 35(A) को बदलने की तैयारी हो रही है जो समस्या की मुख्य वजह है....

15 दिन पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह से अचानक दिल्ली आकर मिली थी जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती। उस मुलाकात में उसने घाटी में हालात खराब होने का भय दिखाकर सरकार से मांग की थी कि कश्मीर घाटी में शुरू हुई NIA की जांच और कार्रवाई के दायरे से हुर्रियत नेताओं, विशेषकर सैय्यद अली शाह गिलानी को बाहर रखा जाए। इस मुलाकात के ठीक 10वें दिन महबूबा मुफ्ती को उसकी मांग का जवाब भारत सरकार ने दे दिया था। 

हुर्रियत के प्रदेश सरगना नईम खान और गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश समेत हुर्रियत के 7 गुर्गों को NIA ने 24 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था। उल्लेखनीय यह है कि गृहमंत्री से अपनी मुलाकात में महबूबा ने किसी भी सूरत में नईम और फंटूश की गिरफ्तारी नहीं करने की मांग विशेष रूप से की थी। यही कारण है कि अपनी उन देशघाती मांगों की खुलेआम उड़ी धज्जियों से तिलमिलाई महबूबा मुफ्ती ने घाटी में तिरंगा उठाने वाला कंधा नहीं मिलने की धमकी शुक्रवार को दी थी।

महबूबा की उस धमकी का मुंहतोड़ जवाब सरकार ने फिर दे दिया है। गिलानी के मुख्य फाइनेंसर जम्मू के बिजनेसमैन देवेंदर सिंह को NIA ने आज गिरफ्तार कर लिया है और गिलानी के बेटे को कल NIA के सामने हाज़िर होने का आदेश दिया है। पूरी उम्मीद है कि गिलानी का बेटा भी एक दो दिन में सलाखों के पीछे होगा।

दो साल की तैयारी के बाद घाटी में असली खेल अब शुरू हुआ है। इस शुरुआत के संकेत शुभ है और सन्देश दे रहे हैं कि खेल का अंत भी शानदार होगा, ऐतिहासिक होगा। क्योंकि देश की कश्मीरी आस्तीनों में छुपे पाकिस्तानी सांपों के जहरीले दांतों को उखाड़ने का अभियान पहली बार प्रारम्भ हुआ है। ईंट का जवाब पत्थर से दिया जा रहा है..।

केंद्र के इस कदम से तिलमिलाई हुई महबूबा ने कहा है कि- यहां की लडाई हमने लडी है हमारे लोग मारे गये हैं, हुरियत ने भी लडी है उनके लोग और हमारे लोग भी मारे गये हैं. अगर हमारे अधिकारों को खतम करने की कोशिश की गई, तो में ये कहना चाहती हूँ कि - झन्डा उठाने के लिये 4 कन्धे भी नही मिलेंगे....महबूबा का यह बयान यह बताने के लिए पर्याप्त है कि - कार्यवाही किस हद तक चल रही है. मेहबुबा की स्थिति इस समय सांप छछुंदर वाली हो गई है. भाजपा के साथ गठबंधन करने के कारण उनकी बात को मानना मजबूरी है और अगर नहीं मानते हैं तो उनकी सरकार जायेगी और कुछ भी नहीं कर पाएंगी। 


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जबकि सरकार गिरने की स्थिति में जम्मू & कश्मीर में राष्ट्रध्यक्ष शासन लगाकर केंद्र का वहां पर पूरी तरह से नियंत्रण हो जाएगा. उस समय भाजपा को अपना एजेंडा लागू करने से कोई रोक भी नहीं पायेगा. भाजपा केवल इतना चाहती है कि - गठबंधन तोड़ने का इल्जाम उसपर नहीं बल्कि पीडीपी पर आये। अब तो ये पूर्ण विशवास है कि - गुजरात, उड़ीसा, हिमाचल, कर्नाटक चुनाव के सकारात्मक चुनाव परिणाम आने के बाद कश्मीर में और तेजी आयेगी. तब तक केंद्र अपनी तैयारी कर रहा है. महबुबा की छटपटाहट से तो यही पता चलता है कि - उनको भी समझ आने लगा है कि -अब क्या होने वाला है।

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Madhukar Kumar