क्या चीन, भारत से युद्ध का खतरा उठा सकता है ? पिछले पूरे सप्ताह -- भारत से युद्ध के भय के कारण चीन से विशाल पूंजी का पलायन हुआ है -- इसे गुप्त रखा जा रहा है।क्या चीन भारत से युद्ध करने की कूवत रखता है -- वो भी भूटान में एक मामूली से भूखंड ‘DOKLAM’ के कारण ?
कभी नहीं ! दस दिन के लिये भी नहीं ।चीन भारत से ‘चिकेन नेक’ को काटना चाहता है -- जिससे भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य कटकर अलग हो जाएं ...इसके लिये चीन ने नक्सलबाड़ी विद्रोह को फण्ड किया।गोरखालैंड का पश्चिमी हिस्सा पूरे पूर्वोत्तर को भारत से काटकर ( पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान की तरह ) अलग थलग कर सकता है -- यही कारण है कि चीन गोरखालैंड का समर्थन करता है ।
भारत को कभी भी ‘चिकेन नेक’ को गोरखालैंड का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिये। चीन के कम्युनिस्ट शासकों को चीन के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों की जनता का समर्थन नहीं है …. भारत इस स्थिति में है कि वह चीन के टुकड़े कर सके ।
Doklam के साथ ही भारत ने पूरी दुनिया को अपनी उपस्थिति का अहसास करा दिया है। रूस भी चीन को समर्थन नहीं देगा। इजराइल बेताब है कि वह कब पाकिस्तान के आणविक ठिकानों को ध्वस्त करे। भारत ने अपने मित्रों और समर्थकों के साथ मजबूती से सम्बन्ध निभाने के संकेत दिये हैं।
चीन के पश्चिमी भाग और तिब्बत (दक्षिणी भाग) में विद्रोह कराया जा सकता है … प्राचीन काल में ये भारत के हिस्से रहे हैं …. अगर चीन ज्यादा उछलेगा तो भारत कैलाश पर्वत सहित अपने सभी प्राचीन हिस्सों को वापस ले लेगा ….चीन OBOR के सपने दिखा रहा है -- भोलेभाले देशों को मुफ्त का भोजन -- जो अमेरिकी सपने को भी काफी पीछे छोड़ता है। यह सपना एक दुःस्वप्न में बदल जाएगा यदि चीन भारत से युद्ध करने की गलती करता है ...
चीन की अर्थव्यवस्था -- जो कि वहाँ के पागल कम्युनिस्ट शासकों द्वारा बनाई गई एक विशाल पॉन्जी स्कीम है, ध्वस्त हो जाएगी, फिर कभी उठ नहीं पाएगी ...चीन है क्या ? ….. चीन की स्थिति सिर्फ पूर्वी हिस्से में है । चीन के पश्चिमी हिस्से में लोग चीनी शासकों से नफ़रत करते हैं। दक्षिणी हिस्सा तिब्बत है -- जो चीन से नफ़रत करता है।तो ले देकर चीन पूर्वी हिस्से में है -- जिसका भूभाग भारत से छोटा है ।
चीन के साम्यवादी शासक युद्ध - अपराधी हैं …. भारत जल्द ही ताइवान में एक नाभिकीय पनडुब्बी बेस की स्थापना करेगा ….चीन धमकी देता है कि वह सिक्किम को छीन लेगा ? …. जरा कर के दिखाओ ….. भारत तुम्हारी भूमि को छोटा करके 40% कर देगा …….. भारत चीन से नहीं डरता ….. चीन सिर्फ अपने पूर्वी हिस्से भर है …… अगर भारत चीन के आठ पूर्वी नगरों को ध्वस्त कर दे तो चीन ख़त्म हो जाएगा !!!
चीन ये जानता है --
हम भी जानते हैं --
“ कि हमें अपने नाभिकीय ICBM मिसाइलों का निशाना कहाँ रखना चाहिये …..”
चीन की अर्थव्यवस्था को पागल लोग चला रहे हैं। चीन की घोस्ट सिटीज़ (भुतहा, सुनसान नगर) इसके सबूत हैं ….. पिछले दस सालों में चीन का लगभग आधा निवेश इन “घोस्ट सिटीज़” में बरबाद हुआ है ।
चीन पर शासन करनेवाले पागलों ने 1.36 करोड़ फ्लैट (घर) बनवाए हैं जिन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है …. ये पूर्णतः निर्मित नगर हैं जिसमें सबकुछ है - पर लोग नहीं हैं ।
निर्माण इतना घटिया है कि मकान गिर रहे हैं। चीन बातों को छुपाता है -- जैसे कि इन ‘घोस्ट सिटीज़’ की रुकी हुई लिफ्टों में कितने लोग मरे हैं …..
यदि भारत चीनी सामानों का बहिष्कार कर दे -- तो चीन गहरी आफत में फंस जाएगा …. चीन का उद्योग तंत्र जितना उत्पादन कर सकता है उतनी मांग उत्पन्न करने में चीनी अर्थव्यवस्था को बहुत समय लगेगा ...
अतः चीन, भारत को ज्यादा दबाने की जुर्रत न करे ….
वरना, हम हर उस देश का समर्थन करेंगे जिससे चीन का सीमा-विवाद है … और चीन का यह विवाद अपने हर पडोसी देश से है …. और चीन हर मामले में गलत है …..
ये देश हैं -- (भारत के अलावा) जापान, वियतनाम, नेपाल, उ. कोरिया, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, द. कोरिया, भूटान, ताइवान, कज़ाख़स्तान, लाओस, ब्रूनेई, ताजिकिस्तान, कंबोडिया, किर्गिजिस्तान, मलेशिया, मंगोलिया और अफ़ग़ानिस्तान ।
भारत के पास 18 नाभिकीय पनडुब्बियां होनी चाहिये, जल्द से जल्द !
चीन हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल को नहीं रोक सकता !!
