चीनी मीडिया ने आमने-सामने जंग की धमकी दी, भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच चीनी मीडिया ने धमकी दी है कि सिक्किम में तनाव आमने-सामने की जंग में बदल सकती है. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन और भूटान ट्राइजंक्शन पर भारतीय फौज का चीनी सैनिकों को सड़क बनाने से रोका जाना चीन की संप्रभुता में सीधे तौर पर दखल है. भारत वहां तनाव पैदा कर रहा है. उन नतीजों के बारे में सोचा जाना चाहिए, क्योंकि ये आमने-सामने की जंग में बदल सकता है. इसमें यह भी कहा गया है कि चीन को मुकाबले के लिए तैयार रहना चाहिए, जो कि लंबे वक्त तक चल सकता है.


Border dispute: India, China each deploy 3,000 soldiers at the tri-junction
चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत से कहा है कि वह सिक्किम से तुरंत अपनी फौज हटाए,73 सड़कें बना रहा है भारत, जिससे वहां तनाव ज्यादा न बढ़े. वह इस मुद्दे पर दूसरे देशों के दूतावासों को जानकारी दे रहा है. वहीं भारत का कहना है कि वह चीन सीमा पर बेहद जरूरी 73 सड़कें बना रहा है.
संप्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध से नहीं डरता चीन : सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के मीडिया समूह के इस अखबार ने लिखा है, 'चूंकि गतिरोध जारी है, इसलिए चीन को दीर्घकालिक हालात का रूप ले रहे गतिरोध से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए, साथ-ही-साथ उसे तार्किक रुख भी बनाए रखना चाहिए. चीन इसकी वकालत नहीं करता है और भारत के साथ सैन्य संघर्ष से बचता है, लेकिन चीन संप्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध करने से डरता नहीं है और वो स्वयं को दीर्घकालिक संघर्ष के लिए तैयार रखेगा.'
सड़क बनाना चाह रहा चीन : बता दें कि सिक्किम बॉर्डर पर ट्राइजंक्शन पर चीन और भारत की सेनाएं आमने-सामने हैं. चीन वहां सड़क बनाना चाह रहा है, जिसका भारत और भूटान विरोध कर रहे हैं. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीन ने पिछले हफ्ते फॉरेन डिप्लोमैट्स के साथ सीक्रेट मीटिंग की थी.
विदेश सचिव ने दी थी जानकारी :बता दें कि इससे पहले विदेश सचिव एस जयशंकर ने एक संसदीय समिति को बताया कि हालिया डोका ला विवाद को लेकर चीन का रुख असामान्य रूप से आक्रामक और साफ है. समिति के कुछ सदस्यों ने यह जानकारी दी. विदेश सचिव ने समिति को बताया कि सीमा को लेकर भारत और चीन ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है लेकिन वे उसका गलत अर्थ लगा रहे हैं, जिसे भारत स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि एक एंग्लो-चीनी समझौते के अनुसार वर्ष 1895 से अब तक भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है.