राहुल गद्दारी का वो नमूना है जो अपनी पार्टी में तो जान न फूक सका,पर उसने दुश्मन चीन में जान फूक ही दी।


देश की जनता और राजनितिक हल्के में एक बड़ा आश्चर्य  तब हुआ  जब अचानक चीन ने पाकिस्तान के जरिये कश्मीर में घुसने की धमकी दे डाली थी।क्यों की कल तक जिस चीन की हवाइया उडी हुई थी भारत के प्रति कुछ भी कहने में सकुचा रहा था , वो अचानक इतनी बड़ी बात बोल जाये तो,सोचना तो बनता था ।लेकिन फिर पता चला की कांग्रेस उपाध्यक्ष और प्रवक्ता, जाकर चीन को प्लान ऑफ़ एक्शन समझा कर आये है।चलो जो शख्स अपनी पार्टी में जान न फूक सका , उसने आखिर चीन में तो फूक ही दी।

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भारत ही नहीं विदेशी कूटनीतिग में बहुत लोग कयास लगा रहे है, आखिर राहुल ने चीनी दूतावास में ऐसा क्या कहा जिससे कांग्रेस रह रह कर छुपा रही है।अब ये कोई बड़ी बात या नई सोच नहीं होगी अगर ये कांग्रेसी परिवार फिर से देश से गद्दारी का कोई नया अध्याय न लिख दे ! इनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं की ये दुश्मनो के साथ मिलकर देश को गिरवी रखने का प्रयास तक करे।  

भूल गए मणिसंकर तो पाकिस्तान जाकर मोदी को हटा देने की दावत दे आये थे और ये अब्दुल्ला के साथ मिल कर कश्मीर को पाकिस्तान को बेच भी सकते है। और चीन को तो नेहरू ने  क्या नहीं दिया था ? और ये सब कांग्रेस पार्टी के आकाओ ने सत्ता के लालच में किया क्योकि सत्ता इस पार्टी के सब कुकर्म करने और सम्पति अर्जन का माध्यम ही रही है।  

आखिर यही तो इनका इतिहास रहा है।इनके सबसे नामी पूर्वज चाचा नेहरू को ले लो । प्रधानमंत्री बनने के लिए इतने उत्सुक थे की, अगर प्रधानमंत्री न बनते तो देश को आज़ाद ही न होने देते। जी हाँ, 1946 में जब देश की आज़ादी पर मोहर लग गई थी तो कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव हुए जिसमे कांग्रेस के 15 में से 14 मेंबर्स ने सरदार पटेल को वोट दिया।



इसका मतलब साफ़ हो गया था की,आज़ाद भारत के प्रधानमंत्री सरदार पटेल बनेंगे पर चाचा को ये कहाँ मंज़ूर, उन्हें देश की आज़ादी से ज्यादा तो सत्ता प्यारी थी। और वो गए गांधीजी के पास, जाकर बोला की अगर मैं कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बना तो मैं कांग्रेस को तोड़ दूंगा , और इस आधार पर ब्रिटिश भारत को ये कह कर आज़ादी नहीं दे पाएंगे की, किस कांग्रेस को भारत सोप कर जाये नेहरू वाली कांग्रेस को को या पटेल वाली कांग्रेस को।

अब क्यों की चाचा का एडविना माउंटबेटन के साथ बहुत अच्छा याराना था, तो लाज़मी था की वो ब्रिटिशर्स को ये बात मनवाने में कामयब भी हो जाते।

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इस के बाद गांधीजी ने सरदार पटेल को एक चिठ्ठी लिखी जिस में उन्होंने सरदार पटेल को सारी बात बताते हुए पीछे हटने को कहा था और नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए।
गांधीजी की बात मानकर पटेल पीछे हट गए और चाचा अपने मनसूबे में कामयाब हो गए। इंदिरा गाँधी ने सत्ता बने रहने के लिए इमरजेंसी जैसा घिनौना इतिहास रचा था ,
ये सब इतिहास के काले पन्नो में दर्ज कुछ उदहारण है इस नेहरू -गाँधी परिवार के वंशागत सत्ता के लालच में नीचे गिरने के।