स्पेस, साइबरस्पेस और ऑपरेशंस के लिए स्पेशल ऑपरेशंस डिविजन बनाना भारत में क्यों जरुरी हो गया है ?

स्पेस, साइबरस्पेस और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए डिफेंस डिविजन जल्द l स्पेस, साइबरस्पेस और गोपनीय अभियानों की चुनौतियों से निपटने के लिए देश के पास तीन विशेषज्ञ संगठन होंगे। सरकार ने कहा है कि डिफेंस स्पेस एजेंसी, डिफेंस साइबर एजेंसी और स्पेशल ऑपरेशंस डिविजन जल्द सामने आने वाले हैं। लंबे समय से इनकी जरूरत महसूस की जा रही है।

राजधानी में दो दिन चली यूनिफाइड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस मंगलवार को खत्म हो गई। इसमें रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। इसमें तीनों सेनाओं के बीच फंक्शनल और ऑपरेशनल तालमेल पर चर्चा हुई। 

2017-01-23-1485181627-4477275-2017012301002605600147081.jpgIndia's cyber infrastructure has been found wanting. Credit: Reuters

From mandatory disclosures to improving CERT-IN’s functioning and transparency, there is much to be done in the event of future cyber attacks.

India has been struggling with numerous armed conflicts on the border and the target of cyber attacks. More than 20,000 pages outlining the secret combat capability of six submarines that French shipbuilder DCNS was designing for the Indian Navy were leaked to the media last year. India’s first opposition leader Rahul Ghandi’s Twitter account was hacked in November.
“Cyber warfare is happening right now. India should not lost out in the cyber revolution,” said Tarun Wig, co-founder of Innefu Labs.
Southeast Asia, including India, is considered to be more vulnerable to cyber attacks. Cyber security vulnerabilities in Southeast Asia alter the safety of the internet on a global scale, said Bloomberg BNA quoting security analysts.
Southeast Asia has the world’s fourth-largest internet population, and smartphone usage is also surging. However, it has an underdeveloped system of data protection laws and weak adoption of cyber security best practices. Besides, illegal software is rampant, making it easier to infect systems with malware.
तीनों सेनाओं में तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति भले न हो पाई हो, लेकिन रक्षा सचिव ने कहा कि स्पेस, साइबर स्पेस और स्पेशल ऑपरेशंस के संगठनों का सपना जल्द ही साकार होगा जिनमें तीनों सेनाओं के लोग होंगे। भारत में फिलहाल दो एकीकृत कमान हैं, जिनमें एक अंडमान निकोबार कमान है, दूसरी स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमान है जो एटमी मामले हैंडल करती है।


आने वाले समय में साइबर युद्ध की आशंका जताई जाती है, जो एटमी हमले से भी खतरनाक हो सकते हैं। तीनों सेनाओं के पास अपने-अपने साइबर सेल हैं, लेकिन वे अभी साइबर सुरक्षा के मामले देख पाती हैं, जबकि साइबर हथियार चलाने में माहिर टीम की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी के मद्देनजर डिफेंस साइबर एजेंसी बनेगी। दुनिया भर में सैकड़ों मिलिट्री सैटलाइट हैं, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। 

स्पेस में भारत की चुनौतियों को देखने के लिए डिफेंस स्पेस एजेंसी होगी। स्पेशल ऑपरेशंस के लिए तीनों सेनाओं में अपनी-अपनी टुकड़ियां होंगी, लेकिन एक टुकड़ी ऐसी तैयार की जाएगी जिसमें तीनों सेनाओं के लोग होंगे। फिलहाल सेना के पास स्पेशल ऑपरेशंस के लिए दो टीमें हैं।

कॉन्फ्रेंस में आर्म्ड फोर्सेज ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग पाठ्यक्रम सुधारने पर भी बात हुई। नैशनल डिफेंस अकैडमी में बीटेक को शामिल करने का फैसला किया है, जिसका मकसद मिलिट्री लीडरों को तकनीकी मामलों में बेहतर बनाना कहा गया है। 

यह बताया गया कि डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में जॉइंट करिकुलम 60 पर्सेंट से ज्यादा कर दिया गया है, जिससे साझी सोच का रास्ता साफ हो गया है। सेना से जुड़ी फिजिकल ट्रेनिंग में स्पोर्ट्स मेडिसिन को भी शामिल करने का फैसला किया गया है।