डोकलाम क्षेत्र में चीन की सेना ने टेंट तो गाड़ लिए लेकिन कमजोर चीनियों का वहाँ टिकना मुश्किल है !

चीनी सैनिकों ने भी भारत के बाद अब चीनी सैनिकों ने भी टेंट गाड़े लेकिन टिकना मुश्किल !

भारत और चीन के बीच विवाद की जड़ बने डोकलाम क्षेत्र में चीन की सेना ने भी लंबी तैनाती की तैयारी कर ली है और तंबू गाड़ लिए हैं, लेकिन यह इलाका उसके लिए बेहद असहज बताया जा रहा है। विवाद वाले इलाके में भारत और चीन की सेनाएं 300-300 की संख्या में बताई गई हैं, लेकिन फिलहाल तनातनी की स्थिति नहीं है। दोनों सेनाओं के बीच महज 120 मीटर की दूरी है, फिर भी टकराव बढ़ने के आसार नहीं दिख रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कर्नल लेवल के अधिकारी दोनों तरफ की सेनाओं की अगुवाई कर रहे हैं। भारतीय सेना के इलाके में टेंट की तैनाती देख चीन ने भी अपने इलाके में टेंट लगा लिए हैं। करीब 10 हजार की फीट की ऊंचाई वाले इस इलाके का तापमान भी फिलहाल सहनीय स्थिति में है। बताया गया है कि भारत के मुकाबले चीन के सैनिक इस इलाके में ज्यादा सहज नहीं हैं।

Border dispute: India, China each deploy 3,000 soldiers at the tri-junctionChinese army at Nathu la pass. The face-off erupted early June in an area along the Sikkim border which China calls Donglang and is also known as Doklam plateau.


भारतीय सेनाओं के लिए ग्राउंड जीरो से सप्लाई पॉइंट महज 8 से 10 किलोमीटर दूर है, जबकि चीन की सेनाओं के लिए यह 60 से 70 किलोमीटर दूर है। चीन की सेना इस इलाके में नहीं रहती है। वह करीब 60-70 किलोमीटर दूर खांबोजोंग में रहती है, लेकिन विवादित इलाके में उसका लगातार आना-जाना लगा रहता है। भारतीय सेना की इस इलाके में हमेशा मौजूदगी रही है। वह दिसंबर तक सहजता से टिके रहने की तैयारी में है। फिलहाल तैनात सैनिकों को इस बात के लिए तैयार रखा गया है कि वे जब जरूरत हो, तब उपलब्ध रहें।

दोनों तरफ की सेनाओं के बीच कोई फ्लैग मीटिंग नहीं हो रही है, क्योंकि दोनों तरफ यह माना जा रहा है कि फैसला अब राजनयिक स्तर पर होना है। राजनयिक स्तर पर भी मामला आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है क्योंकि चीन ने बातचीत से पहले भारतीय सेना के पीछे हटने की शर्त रख दी है। जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति के बीच हाथ मिलाने और मुस्कुराने से उम्मीद जताई जा रही है कि बातचीत आगे बढ़ेगी और कोई न कोई हल निकलेगा।

यहां माना जा रहा है कि चीन की सेना पीछे हटना चाहती है लेकिन राजनीतिक स्तर पर काफी बयानबाजी होने से अब उसका पीछे हटना काफी मुश्किल हो गया है। चीन की सेना पीएलए 1 अगस्त को अपनी वर्षगांठ मनाएगी। इस महत्वपूर्ण तारीख से पहले वह खुद को कमजोर नहीं दिखना चाहेगी। इसके बाद अक्टूबर में चीन के राष्ट्रपति शी चिन पिंग के लिए पार्टी की राजनीति के लिहाज से बड़ा इवेंट होना है। तब तक वह भी पीछे हटने वाला कोई कदम हटाने से बचेंगे। टेंट गाड़े लेकिन टिकना मुश्किल। 

एक  व्याख्यान का आयोजन ली कुआन यिऊ स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी एवं भारतीय उच्चायोग ने किया था। 
जयशंकर ने 'इंडिया-आसियान एंड द चेंजिंग जियोपॉलिटिक्स' विषय पर अपने व्याख्यान में कहा, 'ये लंबी सीमा है जैसा कि आप जानते हैं. ज़मीनी स्तर पर सीमा के किसी हिस्से पर सहमति नहीं बनी है. ऐसे में समय-समय पर मतभेद होने की संभावना रहती है। उन्होंने सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच चल रहे गतिरोध पर प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, 'भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पहली बार नहीं हुआ है. हम पहले भी इस प्रकार की स्थिति से निपटे चुके हैं. इसलिए मुझे ऐसा कोई कारण नज़र नहीं आता कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर हम इससे निपट नहीं पाएंगे।